Monday, October 8, 2007

राम-सेतु

एक अग्नि परीक्षा होगी अदभुत!
प्रभु स्वयं होंगे प्रस्तुत!!
सिया भी संग आएँगी,
प्रभु का संबल बढ़ाएँगी!!

कई युगों से, कई करोड़ घरों में रखी
रामायण पे बन आई है;
कठिन समय है रघुपति,
आस्तित्व सिद्ध करने की घड़ी आई है!

राम सेतु पर प्रभु स्वयं पधारेंगे,
सिया संग खड़े हो अग्नि में जन जन को बतावेंगे,
मिथ्या है ये सब, ये सेतु निराधार है.
इस आस्था के पीछे नही कोई वैग्यानिक आधार है!

एक पुस्तक है रामायण,
उसमें लिखी कुछ बातें हैं.
कहानियों का क्या है
बस किस्से बन जाते हैं!

पत्थर ऐसे भी सेतु देते बाँध जल पर,
भला क्यों लिख दिया राम पत्थर पर?
देखो सेतु तो अभी भी साँस ले रहा है...
राम का नाम पल पल डूब रहा है!

ये कल्युग है.
राम अब अप्रासंगिक है.
वार्ता से कुछ होता नहीं,
क्रोध का औचित्य रहा नहीं!

भय बिनु होई ना प्रीति,
ऐसी नहीं है कोई रीति.
प्रभु विवाद में पड़ना ही नही चाहते;
हाथ जोड़ के राम, राम-सेतु हैं नकारते!
हाथ जोड़ के राम, राम-सेतु हैं नकारते!!

7 comments:

Anonymous said...

keep it up......

Gopakumar said...

Hai Mamta , this is Gop...your poem om Ram Sethu is fine..I will go thru the rest soon..

Amit K. Sagar said...

आप अच्छा लिख रही हैं. लिखते रहिये. शुभकामनायें.
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रचना में आपकी जहाँ चिंता जाहिर सी लगी वहीं आपने बखूबी उकेरा भी.
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उल्टा तीर

सागर नाहर said...

बहुत खूब... एक बात तो माननी होगी कि रामसेतु का राम से कोई लेना देना हो; ना हो, उसके टूटे जाने से लाभ कम और हानि ज्यादा होनी है।
हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, आप हिन्दी में बढ़िया लिखें और खूब लिखें यही उम्मीद है।

॥दस्तक॥
तकनीकी दस्तक
गीतों की महफिल

Raji Chandrasekhar said...

स्वागत है, आप का ।
मैं मलयलम का एक ब्लोगर, थोड़ा थोड़ा हिन्दी में भी ।

Abhijeet said...

This is really a very nice rheotric comment on the people who do not believe in Ram. They can use ram's name for there own benefits but can also deny his existence when required. Please keep on writing these types of poems so that maybe one day there be some change in the perception of people.

Prakul Garg said...

Maam,

TAALIYAAN !!!!!

kya maam... aap IT Industry mein apna saara samay kyun kharaab kar rahe ho..... Apne TALENT ko ubharo... aur kutch kar guzroo....

waise mujhe poetry ki koi tameez nahin hai... magar.. woh kya kehtein hain....
baat mein gehraai thi.... I mean "depth" "depth" .... :)

keep going,
I should see atleast one posting per week.